Sunday, August 31, 2014

कभी फुर्सत मिले तो इधर भी आ जाना...

वक़्त-बेवक़्त चला आता है यहाँ सावन
मेरी यादों की गलियां यूँ भी अक्सर भीगी रहती हैं
एक मुद्दत हुई तुम्हे देखे हुए
कभी फुर्सत मिले तो  इधर भी आ जाना
ये जो पर्दा है बारिशों का वो भी उठा दूंगी
तुम्हारे रहने के क़ाबिल ये मकान बना दूंगी
देखो बाहर एक आसमान तुम्हे लेने आया है
कभी फुर्सत मिले तो  इधर भी आ जाना...

---मीना, अगस्त ३१, २०१४---

Saturday, August 2, 2014

मैं भी हो जाऊँ दीवानी तुम भी पागल बन जाओ

रूप तुम्हारा मैं बन जाऊँ तुम मेरे दर्पन बन जाओ
आज मैं ऐसे टूट के बरसूँ झूम के तुम बादल बन जाओ


मेरे नाम मोहब्बत की तुम कुछ निशानियाँ रख जाओ
मैं सजा लूँ तुम्हे माँग में तुम गजरा-काजल बन जाओ


चलो इश्क़ की राहों में इन हदों से पार हो जाएँ 'मीना'
मैं भी हो जाऊँ दीवानी तुम भी पागल बन जाओ