Sunday, September 28, 2014

कुछ दिन से मेरे दिल में नई चाह जगी है...

कुछ दिन से मेरे दिल में नई चाह जगी है
सर रख के तेरी गोद में सो लूँ तो सुबह हो

 जो बन के हवा रहती है तेरे सीने के अंदर
उस खुशबु को साँसों में समो लूँ तो सुबह हो

लफ़्ज़ों में छुपा रहता है हर दिल का आलम
यह सोच के हर लफ्ज़ को बोलूँ तो सुबह हो

दुनिया में मोहब्बत-सा 'मीना' कुछ भी नहीं है
हर दिल में इसी रंग को घोलूँ तो सुबह हो...!!!

Wednesday, September 17, 2014

आँखें बता रही हैं की जागे हो रात भर...

आँखें बता रही हैं की जागे हो रात भर
पलकों की हर ज़ुबाँ पर दिल का सवाल है 


बरसाओ तीर जितने भी पर ये तो जान लो
पहलु में दिल है दिल में तुम्हारा ख्याल है


कह दो ये ज़रा उनसे 'मीना' की मरना नहीं कमाल
हिज्र-ए-यार में हर पल मर के जीना कमाल है

Monday, September 8, 2014

मैं लिखी गई हूँ तेरी रूह की दीवारों पर...

दूर रह के भी है हर सांस में खुश्बू तेरी
मैं महक जाऊँ तो तू पास बुला ले मुझको


मैं लिखी गई हूँ तेरी रूह की दीवारों पर
स्याही नहीं कि जब चाहे मिटा ले मुझको


मैं तेरी आँख से ढलका हुआ एक आँसू हूँ
तू अगर चाहे, बिखरने से बचा ले मुझको


शाम गुज़र गयी कब से रूठी हुई बैठी है 'मीना'
आ और अब तो आकर मना ले मुझको ……