Tuesday, July 29, 2014

मेरे अक्स से अब तो मिला दे मुझको


बहुत तवील हुई जाती हैं हिज्र की राहें
मंज़िले वस्ल का निशाँ बता दे मुझको

मेरे हाल-ऐ-दिल की खबर है तुझे
अपने हाल-ऐ-दिल का पता दे मुझको

बने थे जो कभी मेरी राहते जाँ
गीत वही फिर से सुना दे मुझको
मैं तो बस्ती हूँ तेरे ही दिल में 'मीना'
मेरे अक्स से अब तो मिला दे मुझको

bahut taweel hui jaati hain hijr ki rahein
manzile wasl ka nishaan bata de mujhko
mere haal-e-dil ki khabar hai tujhe
apne haal-e-dil ka pata de mujhko
bane the jo kabhi meri rahate jaan
geet wahi phir se suna de mujhko
main to basti hun tere hi dil mein 'meena'
mere aks se ab to mila de mujhko

Friday, July 25, 2014

हम मिलेंगे

हम मिलेंगे 
मेरी इस उम्मीद की 
कलाइयों में न 
जाने कितनी चूड़ियाँ 
खनकने लगती हैं 
जब मिलते हैं तो
चूड़ियों से भरी उन कलाइयों
की हरक़त थम जाती है
और उनमें दौड़ जाती है
इक अनदेखी कंपन

Tuesday, July 22, 2014

बादल जब बरसा करते हैं शाम ढले...

बादल जब बरसा करते हैं शाम ढले 
दीवाने तब बहका करते हैं शाम ढले... 

सन्नाटे में चांदनी थिरका करती है 
कुछ साये चीखा करते हैं शाम ढले...

पगली यादों के गुलदस्ते कागज़ के 
फिर काहे महका करते हैं शाम ढले... 

मेरी ग़ज़लें पढ़कर 'मीना' तन्हाई में 
जाने वो क्या सोचा करते हैं शाम ढले... 

baadal jab barsa karte hain shaam dhale
deewaane tab behka karte hain shaam dhale...

sannate mein chandni thirka karti hai
kuchh saaye cheekha karte hain shaam dhale...

pagli yaadon ke guldaste kaagaz ke
phir kaahe mehka karte hain shaam dhale...

meri ghazlein padhkar 'meena' tanhaai mein
jaane wo kya socha karte hain shaam dhale...

Wednesday, July 16, 2014

और हम है दोस्तों ...

ग़म-ऐ-दौरान का पहर है और हम है दोस्तों
होने को बस सहर है और हम हैं दोस्तों

लाई हैं संग उदासियाँ घटाएँ इस बार
बरखा की रुत का कहर है और हम हैं दोस्तों
यह अजनबी सी मंज़िलें और बीते दिनों की याद
तन्हाइयों का ज़ेहर है और हम हैं दोस्तों
आँखों में उड़ रही हैं लुटी महफ़िलों की धूल
आवारगी की लहर है और हम हैं दोस्तों
---मीना, जुलाई १७, २०१४

Sunday, July 13, 2014

एक रोज़ उसे चले ही जाना था

उसे
बेवफ़ा होना ही था
मुझसे
सिलसिला तोडना ही था
कोई रिश्ता रखना ही न था
दो कदम साथ चलना भी न था
एक रोज़ उसे चले ही जाना था
एक रोज़ मुझे संभल ही जाना था
वफ़ा की राह में वो
चल न पायेगा, मुझे यक़ीन था
बाद इसके भी मगर
हरेक लम्हा उसके साथ का
बहुत हसीं था !
मैं जानती हूँ
उसे कहाँ ठहरना था
वो तो बादल था और मैं सहरा
मगर
वो फिर भी मेरा हुआ था
एक पल के ही लिए सही
उसने मेरे दिल की गहराई को छुआ था  
यही तसल्ली है
यही भरम है
मैं यही सोचती हूँ
'एक रोज़ उसे चले ही जाना था
एक रोज़ मुझे संभल ही जाना था...'

Tuesday, July 8, 2014

Suniye...

दिल की गहराइयों में उतरकर सुनिए
हद-ऐ-ख़ामोशी से गुज़रकर सुनिए

कितनी आवाज़ें दबी हैं इस सन्नाटे में
इन दायरों से बाहर निकलकर सुनिए

रात को धड़कनें कहती हैं क्या कुछ
बोलती हैं ख्वाईशें सर चढ़कर सुनिए

गुनगुनाती है ज़िन्दगी उलझनों के परे
बिन कुछ कहे मेरे, बस आकर सुनिए

कौन कहता है कि कानों से सुना जाता है
मोहब्बत है तो 'मीना' दिल में समाकर सुनिए

dil ki gehraaiyon mein utarkar suniye
had-ae-khamoshi se guzarkar suniye

kitni aawazein dabi hain is sannate mein
in daayaron se bahar nikalkar suniye

raat ko dhadkanein kehti hain kya kuchh
bolti hain khwaishein sar chadkar suniye

gungunati hai zindagi uljhanon ke pare
bin kuchh kahe mere, bas aakar suniye

kaun kehta hai ki kaanon se suna jaata hai
mohabbat hai to 'meena' dil mein samakar suniye

Sunday, July 6, 2014

जी चाहता है...

अपने क़ाबू से निकल जाने को जी चाहता है
उनकी बाहों में पिघल जाने को जी चाहता है

मुहब्बत की उड़ानें परों में क़ैद रहीं
इन देहलीज़ों से निकल जाने को जी चाहता है

जिनके गीत हम तन्हाइयों में गुनगुनाते हैं
उसी ग़ज़ल में ढल जाने को जी चाहता है

दूर हैं मुझसे नक़्शे-क़दम भी जिनके
उनके क़दमों में मचल जाने को जी चाहता है

लाख मालूम हो कि झूठे हैं ये वादे 'मीना'
उनकी बातों में बहल जाने को जी चाहता है

apne kaabu se nikal jaane ko jee chahta hai
girte-girte bhi sambhal jaane ko jee chahta hai

muhabbat ki udaanein paron mein qaid rahin
in dehleezon se nikal jaane ko jee chahta hai

jinke geet hum tanhaiyon mein gungunaate hain
usi ghazal mein dhal jaane ko jee chahta hai

duur hain mujhse abhi naqshe-kadam bhi jinke
unke kadmon mein machal jaane ko jee chahta hai

lakh maloom ho ki jhoote hain waade 'meena'
unki baaton mein behal jaane ko jee chahta hai