Thursday, October 30, 2014

के आज रेंगते हुए लम्हों से फिर दोस्ताना हुआ.…

उदास उदास रहना देखा इसको एक ज़माना हुआ
जब ग़मों का आइना देखा तो मुस्कुराना हुआ

के आज बीते हुए मौसमों कि याद आई 'मीना'
के आज रेंगते हुए लम्हों से फिर दोस्ताना हुआ.…

Sunday, October 26, 2014

ख़ामोशी कहती है...

ख़ामोशी कहती है जो लफ्ज़  नहीं कह सकते
लोग चुप रह कर भी इज़हार किया करते हैं

घर नहीं लगता ये घर अब तो बुला उसको 'मीना'
मुझसे मिन्नत दर-ओ-दीवार किया करते हैं

khamoshi kehti hai jo lafz nahin keh sakti
log chup reh kar bhi izhaar kiya karte hain

ghar nahin lagta ye ghar ab to bula usko 'meena'
mujhse minnat dar-o-deewar kiya karte hain