दूर रह के भी है हर सांस में खुश्बू तेरी
मैं महक जाऊँ तो तू पास बुला ले मुझको
मैं लिखी गई हूँ तेरी रूह की दीवारों पर
स्याही नहीं कि जब चाहे मिटा ले मुझको
मैं महक जाऊँ तो तू पास बुला ले मुझको
मैं लिखी गई हूँ तेरी रूह की दीवारों पर
स्याही नहीं कि जब चाहे मिटा ले मुझको
मैं तेरी आँख से ढलका हुआ एक आँसू हूँ
तू अगर चाहे, बिखरने से बचा ले मुझको
शाम गुज़र गयी कब से रूठी हुई बैठी है 'मीना'
आ और अब तो आकर मना ले मुझको ……
तू अगर चाहे, बिखरने से बचा ले मुझको
शाम गुज़र गयी कब से रूठी हुई बैठी है 'मीना'
आ और अब तो आकर मना ले मुझको ……
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