इक नए देस को सिधारे हो
तुम जहां भी रहो हमारे हो.…
मैं कली के लिबास में आऊँगी
इत्र बन कर फ़िज़ा में छाऊँगी
फ़िक्र की ख़िल्वतों में आऊँगी
ग़म के साये में गुनगुनाउँगी
नज़्म की रूह बन के आऊँगी
गीत की लय में समाऊँगी
इक नए देस को सिधारे हो
तुम जहां भी रहो हमारे हो.…
तुम जहां भी रहो हमारे हो.…
मैं कली के लिबास में आऊँगी
इत्र बन कर फ़िज़ा में छाऊँगी
फ़िक्र की ख़िल्वतों में आऊँगी
ग़म के साये में गुनगुनाउँगी
नज़्म की रूह बन के आऊँगी
गीत की लय में समाऊँगी
इक नए देस को सिधारे हो
तुम जहां भी रहो हमारे हो.…
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