खुद से बस एक ही शिकायत है, हाल-ए-दिल केह न सके
पूछा तो सबने बहुत, बस लफ्ज़ ही निकल न सके
न जाने किसकी इनायत है ये, ज़िन्दगी एक ग़ज़ल बन गयी
काफियों को निभा भी दिया, बस गा कर सुना न सके
पूछा तो सबने बहुत, बस लफ्ज़ ही निकल न सके
न जाने किसकी इनायत है ये, ज़िन्दगी एक ग़ज़ल बन गयी
काफियों को निभा भी दिया, बस गा कर सुना न सके
Khud se bas ek hi
shikayat hai, haal-e-dil keh na sake
Poochha to sabne
bahut, bas lafz hi nikal na sake
Na jaane kiski inaayat
hai ye, zindagi ek ghazal ban gayi
Kaafiyon ko nibha bhi
diya, bas gaa kar suna na sake
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