किसी की याद चमक उठी है
दर्द-सा बन कर इक-इक साया जाग रहा है
आवाज़ें-सी कुछ आती हैं
गुज़रे थे इक बार यहीं से
लेकिन आज उड़ी जाती है
इसी मिट्टी की सोंधी खुशबू
जिसमें आँसू बोये थे
और एक बार फिर मैं पलट देती हूँ
उन बोसीदा किताबों के पन्नों को
जिनमें तुम्हारा नाम लिखा था
---'मीना'---
दर्द-सा बन कर इक-इक साया जाग रहा है
आवाज़ें-सी कुछ आती हैं
गुज़रे थे इक बार यहीं से
लेकिन आज उड़ी जाती है
इसी मिट्टी की सोंधी खुशबू
जिसमें आँसू बोये थे
और एक बार फिर मैं पलट देती हूँ
उन बोसीदा किताबों के पन्नों को
जिनमें तुम्हारा नाम लिखा था
---'मीना'---
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