Saturday, June 28, 2014

हर वक़्त हूँ वाबस्ता जिससे

हर वक़्त हूँ वाबस्ता जिससे
महसूस उसी की कमी क्यों है

हटती नहीं जिसके चेहरे से नज़र
तस्वीर वो आज धुँधली क्यों है

वो वस्ल का दिन क्यों छोटा था
ये हिज्र की रात बड़ी क्यों है

जिस बात से दिल में हलचल है
वो बात लबों पे रुकी क्यों है

मत देख की कौन है परवाना
ये देख की शम्मा जली क्यों है
--- 'मीना', २७ जून, २०१४

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