Wednesday, June 17, 2015

मुझे जाने की इज़ाज़त दे दो...

मुझे जाने की इज़ाज़त दे दो
अश्क़ों को मुझे तुम पीने दो 
 
अपने दिल से यूँ विदा करो 
तुम मुझको खुद से रिहा करो
आँखों के आँसू सब देखें 
कोई दिल की दरारें देखे न 
ख़ामोशी के लब सीने दो 
और गुमनामी में बहने दो
यादें हमारी तुम अता करो
तुम मुझको खुद से रिहा करो
कोई झूट ही आकर कह देता 
ये दर्द हमारे सब झूठे हैं 
इन तल्ख़ समाजों को रहने दो
गहरे ज़ख्मों को सहने दो
हमें चैन मिले ये दुआ करो
तुम मुझको खुद से रिहा करो
----मीना----

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