Saturday, July 18, 2015

दिल में इक आस सी उभरती है...

दिल में इक आस सी उभरती है
तेरे ही नाम से सँवरती है

कोई बेनींद रात चुपके से
मेरे कन्धों पे लो उतरती है
जैसे इक याद चाँदनी बन कर 
मेरी आँखों से यूँ बिखरती है

खोलो अब आसमाँ कि खिड़की
उस की खुशबू यहाँ गुज़रती है

जैसे तुम आये हो गया ज़ाहिर
मेरी सूरत सुना निखरती है
---मीना---

No comments:

Post a Comment