सोचती हूँ ज़िन्दगी के आखिरी पड़ाव पे मैं खुद को क्या जवाब दूँगी
क्या अब भी ख्वाब सजाती हूँ
बादल के, धूप के, पानी के
क्या अब भी मुहब्बत करती हूँ
गाती हूँ गीत जवानी के
बादल के, धूप के, पानी के
क्या अब भी मुहब्बत करती हूँ
गाती हूँ गीत जवानी के
क्या सुबहो-शाम परिन्दों की
परवाज़ में ध्यान डूबता है
क्या अब्र के परदे हटाते हुए
वो सोच का चाँद झाँकता है
परवाज़ में ध्यान डूबता है
क्या अब्र के परदे हटाते हुए
वो सोच का चाँद झाँकता है
क्या दिल के चमन में बसते हैं
नग़मों की धुन, पायल की खनक
क्या प्यास की शिददतें अब भी वही
आँखों में ले आती हैं लचक
नग़मों की धुन, पायल की खनक
क्या प्यास की शिददतें अब भी वही
आँखों में ले आती हैं लचक
हर लफ्ज़ की रूह से उठती है
बेचैन सदा जो कहती है…
कुछ दिल की सुनाओ ऐ 'मीना'
कहो, सफर तुम्हारा कैसा रहा ?
बेचैन सदा जो कहती है…
कुछ दिल की सुनाओ ऐ 'मीना'
कहो, सफर तुम्हारा कैसा रहा ?
क्या अब भी ख्वाब सजाती हो ?
क्या अब भी मुहब्बत करती हो ?
क्या अब भी मुहब्बत करती हो ?
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