Friday, October 7, 2016

तुम्हारे बग़ैर मैं
इक सूने-ख़ाली घर सी हूँ
जो तुम
अब
मुझे देखते नहीं
मुझ में रहते नहीं
तो यहाँ
इस घर के दरीचों में
बस सिर्फ़ दर्द रहता है ...

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