किस के क़दमों के निशाँ हैं हर तरफ फैले हुए
घर में बैठी हूँ तो बाहर जाता अब ये कौन है
सुब्ह उठकर तारे चुनती रहती हूँ बिस्तर से मैं
रात छुपके मेरे घर में आता अब ये कौन है
रात भर भीगी हूँ 'मीना' मैं भी किसकी ओस में
आसमाँ से चाँदनी बरसाता अब ये कौन है.…
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