Sunday, October 11, 2015

Sridhar...

मेरा एक अज़ीज़ साथी अब नहीं रहा.…उसने अपनी ज़िन्दगी के चालीस साल एक नया समाज बनाने की जद्दो-जहद में लगा दिये...ये जगह अब खाली है दोस्तों...

मैं भी वही हूँ और मेरा शहर भी वही
लेकिन जो आशना था वो चहरा नहीं रहा

'मीना' बिछड़ के उस से बड़ी मुश्किलों में हूँ
जो जी रहा था मुझ में वो ज़िन्दा नहीं रहा

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