Friday, February 6, 2015

यादें लफ़्ज़ों में उतरती रहीं...

हसीं खामोशियों के सायों में
वस्ल की रातें ढलती रहीं...

सूने सफ़ेद कागज़ों पे रह रह कर
यादें लफ़्ज़ों में उतरती रहीं...

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