Thursday, February 12, 2015

क्या डराती हैं हवाएँ मुझे अंजाम से...

मैं तो मिट्टी का बदन ओढ़ के खुद निकली हूँ
क्या डराती हैं हवाएँ मुझे अंजाम से...!!!


अपने चेहरे पे न औरों के ख़्याल सजा 'मीना'
रूप आता है कहीं किसी के दिए नाम से...!!!

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