उसे
बेवफ़ा होना ही था सिलसिला तोडना ही था
एक रोज़ मुझे संभल ही जाना था
वफ़ा की राह में वो
चल न पायेगा, मुझे यक़ीन था
बाद इसके भी मगर
हरेक लम्हा उसके साथ का
बहुत हसीं था !
मैं जानती हूँ
उसे कहाँ ठहरना था
वो तो बादल था और मैं सहरा
मगर
वो फिर भी मेरा हुआ था
एक पल के ही लिए सही
उसने मेरे दिल की गहराई को छुआ था
यही तसल्ली है
यही भरम है
मैं यही सोचती हूँ
'एक रोज़ उसे चले ही जाना था
एक रोज़ मुझे संभल ही जाना था...'
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