हम मिलेंगे
मेरी इस उम्मीद की
कलाइयों में न
जाने कितनी चूड़ियाँ
खनकने लगती हैं
जब मिलते हैं तो
चूड़ियों से भरी उन कलाइयों
की हरक़त थम जाती है
और उनमें दौड़ जाती है
इक अनदेखी कंपन
मेरी इस उम्मीद की
कलाइयों में न
जाने कितनी चूड़ियाँ
खनकने लगती हैं
जब मिलते हैं तो
चूड़ियों से भरी उन कलाइयों
की हरक़त थम जाती है
और उनमें दौड़ जाती है
इक अनदेखी कंपन
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