सोचती हूँ
कैसे कटेंगे ये दिन
तुम्हारे बिन…
न मैसेजेस की टनटन
न कहकहों की खनखन
दुनिया भर की गप्पें
वो शायरी वो नज़्में
करेगा कौन मुझसे मीठी बातें
कटेंगी कैसे सन्नाटे-सी रातें
सोचती हूँ
रह भी पाउंगी
क्या तुम बिन...
कैसे कटेंगे ये दिन
तुम्हारे बिन…
न मैसेजेस की टनटन
न कहकहों की खनखन
दुनिया भर की गप्पें
वो शायरी वो नज़्में
करेगा कौन मुझसे मीठी बातें
कटेंगी कैसे सन्नाटे-सी रातें
सोचती हूँ
रह भी पाउंगी
क्या तुम बिन...
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