न होगे तुम तो फिर हमको सताने कौन आएगा
अपनी मीठी मीठी बातों से रिझाने कौन आएगा
तुम्हारे आंसुओं को पोंछने वाले तो हैं लेकिन
जो हम रोये तो समझाने बुझाने कौन आएगा
अपनी मीठी मीठी बातों से रिझाने कौन आएगा
तुम्हारे आंसुओं को पोंछने वाले तो हैं लेकिन
जो हम रोये तो समझाने बुझाने कौन आएगा
ख़फ़ा होते हैं हम खुद से मना लेते हैं हम खुद को
हमें मालूम है कि अब हमको मनाने कौन आएगा
ज़माना मतलबी है मतलबों की बात करता है
ग़ज़ल हमको मोहब्बत की सुनाने कौन आएगा
हमें मालूम है कि अब हमको मनाने कौन आएगा
ज़माना मतलबी है मतलबों की बात करता है
ग़ज़ल हमको मोहब्बत की सुनाने कौन आएगा
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