Thursday, August 20, 2015

फूल रख लेना तुम किताब में...

बात माज़ी की वो जभी सुनाते हैं
अश्क़ आँखों में खूब मुस्कराते हैं
हंस पड़ा है क्यों देख आइना तुम को
राज़ कैसे कैसे सभी छुपाते हैं
बात करते हैं जो सदा मुहब्बत की
ज़ख़्म दिल पर भी तो वही लगाते हैं
नफरतों के ऐसे दयार में हमको
प्यार करने वाले ही बस सुहाते हैं
बाँट लेना गर बाँट ही सको तुम तो
सबके चेहरों पे ग़म हज़ार पाते हैं
फूल रख लेना तुम किताब में 'मीना'
ये ख़िज़ाओं में भी बहार लाते हैं...!!!

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