अमन की सोच के रिश्तों की माला छीन लेता है
कभी मस्ज़िद कभी कोई शिवाला छीन लेता है
जिसे अच्छा नहीं लगता ज़मीं का आसमां होना
गरीबों के हलक से भी निवाला छीन लेता है
दिलों के प्यार की बातें जिसे लगतीं ज़हर जैसीं
वही साक़ी सभी प्यासों से प्याला छीन लेता है
जिसे अच्छी नहीं लगती घरों में रौशनी 'मीना'
वही जलते चरागों से उजाला छीन लेता है...!!!
कभी मस्ज़िद कभी कोई शिवाला छीन लेता है
जिसे अच्छा नहीं लगता ज़मीं का आसमां होना
वही तो ख़्वाब जो बेबाक़ पाला छीन लेता है
करेगा जो बड़ी बातें ज़माने को दिखाने की गरीबों के हलक से भी निवाला छीन लेता है
दिलों के प्यार की बातें जिसे लगतीं ज़हर जैसीं
वही साक़ी सभी प्यासों से प्याला छीन लेता है
जिसे अच्छी नहीं लगती घरों में रौशनी 'मीना'
वही जलते चरागों से उजाला छीन लेता है...!!!
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