इस जुनूँ के दौर में ढूँढें सुकूने दिल कहाँ
हर तरफ तूफ़ान ही तूफ़ान है साहिल कहाँ
दे सकें कोई ख़ुशी कोई तो ग़म ही बाँट लें
दौड़ती सी ज़िन्दगी फ़ुरसत हमें हासिल कहाँ
बीच की दीवार उसने कर ली ऊँची और भी
पास रहकर दोस्त मेरे हाल में शामिल कहाँ
ऐसे राही को भला कैसे दिखाएँ रास्ता
मील के पत्थर से जो पूछे कि है मंज़िल कहाँ
सोचती हूँ ले चलूँ मैं साथ अपने कारवाँ
रौशनी दिखलाएगा गुमराह को ग़ाफ़िल कहाँ
हर तरफ तूफ़ान ही तूफ़ान है साहिल कहाँ
दे सकें कोई ख़ुशी कोई तो ग़म ही बाँट लें
दौड़ती सी ज़िन्दगी फ़ुरसत हमें हासिल कहाँ
बीच की दीवार उसने कर ली ऊँची और भी
पास रहकर दोस्त मेरे हाल में शामिल कहाँ
ऐसे राही को भला कैसे दिखाएँ रास्ता
मील के पत्थर से जो पूछे कि है मंज़िल कहाँ
सोचती हूँ ले चलूँ मैं साथ अपने कारवाँ
रौशनी दिखलाएगा गुमराह को ग़ाफ़िल कहाँ
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