मुहब्बत की रंगीनियाँ छोड़ आये
तेरे शहर में इक जहाँ छोड़ आये (हबीब जालिब)
मिले थे जो तुझसे मुहब्बत के तोफे
न पूछो के हम वो कहाँ छोड़ आये
मुहब्बत की रंगीन उस अंजुमन से
जुदा होके इक मेहरबाँ छोड़ आये
चमन में हमारा नशेमन है लेकिन
तुम्हारे लिए आशियाँ छोड़ आये
अँधेरे न आएँ तेरे रास्ते में
तेरी राह में कहकशाँ छोड़ आये
निगाहे करम एक मीना पे करके
तड़पता उसे नीम-जाँ छोड़ आये
--- मीना
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