Monday, May 8, 2017

क्या शै है जहाँ निशाँ नहीं है
कैसे कहूँ दूँ तू यहाँ नहीं है...!!!
साया है तेरी मौहब्बतों का
सर पर मेरे आसमाँ नहीं है...!!!
नमालूम...

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