कभी मुझे ऐसा महसूस होता है
कि वो मेरी पीठ पर
अपनी उँगलियों से
बुन रहा है कोई कहानी
और
तब मुझमें
गुनगुनाने लगता है
एक गीत
बहकने लगती है ख़ामोशी
जैसे तमाम कायनात
नशे में हो ....
कि वो मेरी पीठ पर
अपनी उँगलियों से
बुन रहा है कोई कहानी
और
तब मुझमें
गुनगुनाने लगता है
एक गीत
बहकने लगती है ख़ामोशी
जैसे तमाम कायनात
नशे में हो ....
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