Monday, May 8, 2017

मुझे शायद संभल के जीना नहीं आता
जब उदास होती हूँ
तब रोती नहीं बरसती हूँ
जब ख़ुश होती हूँ
तो हँसती नहीं चमक उठती हूँ
और ग़ुस्से में
सिर्फ़ चिल्लाती नहीं भभकने लगती हूँ
फिर मुहब्बत भी कुछ ऐसे ही
कोई हद नहीं बस बेहद ...
लेकिन शायद ये ठीक नहीं है
क्यूँकि जब इश्क़ छोड़ता है
तब मैं सिर्फ़ टूटती ही नहीं
बिखर जाती हूँ...

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