मैं सिर्फ एक लफ्ज़ हूँ
अकेला, तनहा, असहाय
आधा अधूरा सा
दूसरों के साथ जुड़कर ही
बन पाता हूँ इक कहानी
वर्ना मैं रह जाता हूँ
कभी सुना, कभी कहा
बस एक लफ्ज़
पाबंदियों से मुक्त
जैसे बेसरहद हवा
फिरता आवारा सा
अकेला इस सफर में
बाँध कर तुम
इसे दास्तान बना दो बाँध कर तुम
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