वक़्त कोई झील नहीं जो जम जाए
आते रहते हैं कई तूफ़ान
दीवार पर लगी तसवीरें
तस्वीरों में छुपे लोग
लोगों से जुडी यादें
वक़्त के अपने क़िस्से हैं
ज़ेहन पर परतें हैं
कहो तो धूल हटा दें
लम्हे उड़ते हुए
ख़ुशबुओं की तरह
सिमटते-फ़ैलते
सांचे में वक़्त के ढल कर
अजीब शक्ल के बन कर
न रास्ता अपना
न मंज़िल अपनी
इल्म की चादर ओढ़े
ग़ुमशुदा मुसाफ़िर
ख्वाब बिखेरते हुए
झूझते अपने ख्यालों से
घिरे पेचीदा सवालों से
चल रहे हैं सभी
वक़्त के अपने क़िस्से हैं
देखना है कल सुबह
कितने सूरज निकलते हैं
आते रहते हैं कई तूफ़ान
दीवार पर लगी तसवीरें
तस्वीरों में छुपे लोग
लोगों से जुडी यादें
वक़्त के अपने क़िस्से हैं
ज़ेहन पर परतें हैं
कहो तो धूल हटा दें
लम्हे उड़ते हुए
ख़ुशबुओं की तरह
सिमटते-फ़ैलते
सांचे में वक़्त के ढल कर
अजीब शक्ल के बन कर
न रास्ता अपना
न मंज़िल अपनी
इल्म की चादर ओढ़े
ग़ुमशुदा मुसाफ़िर
ख्वाब बिखेरते हुए
झूझते अपने ख्यालों से
घिरे पेचीदा सवालों से
चल रहे हैं सभी
वक़्त के अपने क़िस्से हैं
देखना है कल सुबह
कितने सूरज निकलते हैं
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