सुनो,
तुम मुझसे अब फासले में रहा करो
हर बात को हंसी में न उड़ाया करो
तुमको मुझसे मोहब्बत भी है
ये बातें तुम यूँही न सुनाया करो
अक्सर मिलते हैं हम ख्वाबों में जब
फिर रोज़ रोज़ मिलने न बुलाया करो
जब दिल के आईने में है अक्स तुम्हारा
अपनी तस्वीर यूँ रोज़ न दिखाया करो
तेज़ होती हैं जिनसे धड़कनें दिल की तुम मुझसे अब फासले में रहा करो
हर बात को हंसी में न उड़ाया करो
तुमको मुझसे मोहब्बत भी है
ये बातें तुम यूँही न सुनाया करो
अक्सर मिलते हैं हम ख्वाबों में जब
फिर रोज़ रोज़ मिलने न बुलाया करो
जब दिल के आईने में है अक्स तुम्हारा
अपनी तस्वीर यूँ रोज़ न दिखाया करो
वही गीत हर वक़्त न गुनगुनाया करो
जानते हो न की मचल उठते हैं अरमाँ
तुम इस क़दर मुझे याद न आया करो
लिख ही दी है जब ग़ज़ल मेरे नाम 'मीना'
फिर लिख कर उसे न मिटाया करो
Suno,
tum mujhse ab faasle mein raha karo
har baat ko hansi mein na udaya karo
tumko mujhse mohabbat bhi hai
ye baatein tum yunhi na sunaya karo
aksar milte hain hum khwabon mein jab
phir roz roz milne na bulaya karo
jab dil ke aaine mein hai aks tumhara
apni tasveer yun roz na dikhaya karo
tez hoti hain jinse dhadkanein dil ki
wahi geet har waqt na gungunaya karo
jaante ho na ki machal uthte hain armaan
tum is qadar mujhe yaad na aaya karo
likh hi di hai jab ghazal mere naam 'meena'
phir likh kar use na mitaya karo...
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