काफी देर से
खुद से झूझ रही हूँ मैं
कुछ लिखना चाहती हूँ
पर हाथ ही नहीं उठ रहे
न जाने यह कैसी चुप है
जैसे दिल और दिमाग
दोनों कह रहे हों
पैक अप ....
खुद से झूझ रही हूँ मैं
कुछ लिखना चाहती हूँ
पर हाथ ही नहीं उठ रहे
न जाने यह कैसी चुप है
जैसे दिल और दिमाग
दोनों कह रहे हों
पैक अप ....
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