Thursday, March 31, 2016

आज़ाद का
आज़ाद होना ही
उसका मज़हब है
वैसे कोई भी
मज़हब आज़ाद नहीं होता …
कई चीज़ें हैं
जो सच लगती हैं
पर सच नहीं होतीं
जैसे शादी और आज़ादी
कई चीज़ें
सच नहीं लगतीं
पर सच होती हैं
जैसे प्यार और मुहब्बत

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