एक साल गुज़रता है... एक साल को आना है...
लफ़्ज़ों का एक कारवाँ है
जो साथ में मेरे चलता है
जो साथ में मेरे चलता है
कुछ दुख तेरे कुछ दुख मेरे
कुछ ख़्वाब शिक़स्त पलकों के
कुछ तन्हाई के पल
ज़ख्मी परवाज़ें... टूटे पर
मुस्कान के साये में आँसू
बेनाम सी चाहत के दुखड़े
सब एक गठड़ी में बाँध लिए
और दरिया में बहा दिए
कुछ दुख तेरे कुछ दुख मेरे
कुछ ख़्वाब शिक़स्त पलकों के
कुछ तन्हाई के पल
ज़ख्मी परवाज़ें... टूटे पर
मुस्कान के साये में आँसू
बेनाम सी चाहत के दुखड़े
सब एक गठड़ी में बाँध लिए
और दरिया में बहा दिए
कुछ दुख तेरे कुछ दुख मेरे
काग़ज़ के फ़लक पे उतरे हैं
एहसास के तारों के लश्कर
हर लफ्ज़ की रूह से उठती है
बेचैन सदा जो कहती है...
एहसास के तारों के लश्कर
हर लफ्ज़ की रूह से उठती है
बेचैन सदा जो कहती है...
आ देख! सफर में हैं अब तक
आ मिल! तुझे कुछ कहना है
एक साल गुजरने वाला है
एक साल अभी तक आना है....
आ मिल! तुझे कुछ कहना है
एक साल गुजरने वाला है
एक साल अभी तक आना है....
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