Thursday, March 31, 2016

सुनो,
तुम  और मैं  हर वक़्त झगड़ते हैं  
अपने-अपने सच को साबित करने के लिए 
कितना चिल्लाते हैं  
कई कई दिनों तक 
एक दुसरे से रूठ जाते हैं  
और फिर दूसरा मना ले 
इसकी दुआ भी मनाते हैं  

ये सिर्फ तुम से 
सिर्फ एक तुम जिसके साथ मैं बच्ची सी बन जाती हूँ 
मेरी हर बात तुमसे मनवाती हूँ 
मेरी तल्ख बातें भी नज़र अंदाज़ करवाती हूँ 
बेसुरे से गीत  सुनाती हूँ  
और अगर तुम वाह न करो तो मुंह फुलाती हूँ 
ये सिर्फ तुम् से..... 

लेकिन... 
कल जब 
जान बूझकर मैंने कप को नीचे फेंका 
बेसबब ही तुम्हारी शर्ट को जलाया 
बैठे बैठे खुद पे पानी गिराया 

तो तुम 
ख़फ़ा क्यों नहीं हुए 
क्यों बिगड़े नहीं मुझसे 
बात क्या है, क्यों झगड़ नहीं पाये तुम 

सुनो,
टेढ़ी टेढ़ी नज़रों से घूर कर 
जुदा हो जाओ ना 
चंद लम्हों के लिए ही सही  
ख़फ़ा हो जाओ ना

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