Thursday, March 31, 2016

जाने क्यूँ एक अजीब सी उदासी है, सोचती हूँ....
जो कुछ हुआ, हुआ, अबसे किस्सों का अंत भला देना
मूँगफली का अंतिम दाना, फिरसे मत कड़वा देना...

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